महाबलीपुरम के पास बसा एक मछुआरों का गांव

शाम हो रही थी, मेरे कमरे से सूर्यास्त दिख रहा था| नीचे मेरे गेस्ट हाउस का मालिक और उसके साथी अपनी मछली पकड़ने के जाल की मरम्मत करने में लगे हुए थे| कुछ बच्चे खेल रहे थे और अँगरेज़ अपने सितार, गिटार ले कर रियाज़ फर्मा रहे थे|

[Photo Story] छठ पूजा 2017

छठ की एक खास बात यह है की ये एकमात्र ऐसा पर्व है जहाँ कोई पंडा पुजारी किसी भी तरह का कर्मकांड कराता नहीं दिखेगा| 36 घंटे निर्जल उपवास वाला ये त्यौहार अकेला डूबता सूर्य की पूजा करने के लिए जाना जाता है|

आदि, अंत और अनंत – धनुषकोडी

सं 1964 तक धनुषकोडी एक फलता फूलता मछुआरों का गांव हुआ करता था| 1964 में आए एक तूफान ने इस गांव को उजाड़ दिया और साथ में इस गांव को रामेश्वरम से जोड़ने वाला रेलवे ट्रैक, ट्रैन और उसके डब्बे तक उड़ा कर ले गई|

Taking a Glimpse of Pakistan at Wagah Border

Visiting the Wagah Border was like a dream come true because I was this close to Pakistan with only a thin imaginary line dividing us apart. A line that separated a landmass into two calling it two different countries with people of similar complexion and almost similar lifestyle that you are not supposed to visit.

फोटो यात्रा: देव दीपावली वाराणसी 2016

देव दिवाली के दिन घाटों को सजाने का काम एक दिन पहले ही शुरू हो जाता है| सुबह सुबह घाटों पर लड़किया रंगोलिया बनाना शुरू कर देती है| हर घाट की एक अलग रंगोली होती है| इस काम में विदेशो से आई लड़किया भी शामिल हो जाती है| उनके लिए तो ये भी incredible India का एक unique experience है|

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