खीरगंगा: भूली भटकी यात्रा

कुछ 40 मिनट के बाद मै बरशैणी पहुचता हूँ, शाम हो चूकी है, लग रहा हैं जैसे बारिश होगी। मुझे अभी कल्गा तक जाना है, जहाँ से मेरा कल का ट्रेक शुरू होगा। चलते चलते बूंदे टपकने लगती है, आसमान काला होने लगता है, थोड़ी दूर पर बर्फ से ढंकी पिन पार्वती घाटी की चोटियाँ मुझे आवाज़ देती है, नीचे पार्वती नदी की धाराए अपना अलग ही राग गाती है।

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